मेरा किरदार मेरी बात कहाँ सुनता है ये समझदार मेरी बात कहाँ सुनता है इश्क़ है वादा-फ़रामोश नहीं है कोई दिल तलबगार मेरी बात कहाँ सुनता है
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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ये अलग बात कि ख़ामोश खड़े रहते हैं फिर भी जो लोग बड़े हैं, वो बड़े रहते हैं
Rahat Indori
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सोचूँ तो सारी उम्र मोहब्बत में कट गई देखूँ तो एक शख़्स भी मेरा नहीं हुआ
Jaun Elia
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तेरी सूरत से है आलम में बहारों को सबात तेरी आँखों के सिवा दुनिया में रक्खा क्या है
Faiz Ahmad Faiz
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क्या ख़बर कौन था वो, और मेरा क्या लगता था जिस सेे मिल कर मुझे, हर शख़्स बुरा लगता था
Tehzeeb Hafi
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भूल जाना नहीं रहा ताबिश वो दीवाना नहीं रहा ताबिश ज़िंदगी का सुलूक मेरे साथ दोस्ताना नहीं रहा ताबिश हम की हंसते हैं क्योंकि रोने को कोई शाना नहीं रहा ताबिश
Vishal Singh Tabish
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दोस्त मेरा ये मानना है एक एक हम-सब हैं और ख़ुदा है एक मुझ सेे हर शख़्स रुठ जाता है मेरा होना भी मसअला है एक
Vishal Singh Tabish
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ये ज़माना ये दौर कुछ भी नहीं बस मोहब्बत है और कुछ भी नहीं
Vishal Singh Tabish
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एक अजब सानेहा गुज़रा है मेरे माज़ी में मेरी दिलचस्पी ख़त्म हो गई है शादी में
Vishal Singh Tabish
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कहानी में तुम्हारे ज़िक्र भर से मेरा किरदार हल्का हो रहा है
Vishal Singh Tabish
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