sherKuch Alfaaz

एक तस्वीर जो बन आती है बीनाई में याद बस उस को ही करता हूँ मैं तन्हाई में हम को अब जाके ये मालूम हुआ है यारों कितना कुछ होता है इक शख़्स की परछाई में

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देखो इतना भी ये आसान नहीं होता है ग़म हो तो कौन परेशान नहीं होता है इश्क़ में ख़ुद-कुशी करने जा रहे ऐ लड़के तुम तो कहते थे कि नुक़सान नहीं होता है

Kumar gyaneshwar

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वफ़ा की बात पर इतनी शिकायत कौन करता है न जाने इन गुलाबों से मोहब्बत कौन करता है हमारे साथ रह कर तुम भी इतना सीख जाओगे पुरानी याद की आख़िर हिफाज़त कौन करता है।

Kumar gyaneshwar

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दुआएँ देता है पर मसअले का हल नहीं करता मैं और करता भी क्या ख़ुद को अगर पागल नहीं करता मोहब्बत भी नहीं मिलती न दिल ये टूटता ही है ख़ुदा मुझ को किसी भी काम में अव्वल नहीं करता

Kumar gyaneshwar

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कोई इस दर्जा न हो आसान मुझ पर यूँँ लगे अब हो रहा एहसान मुझ पर एक रिश्ता एक वा'दा एक लड़की बस हुआ इतनों का ही नुक़्सान मुझ पर

Kumar gyaneshwar

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जो बच्चे अपनी नादानी में करते हैं वो सब हम जैसे हैरानी में करते हैं न पूछो फ़ायदा हम सेे मोहब्बत का यही इक काम नुक़सानी में करते हैं

Kumar gyaneshwar

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