फ़लक इतना सूना है क्यूँ ज़मीं पर तो सब मेरे थे
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क्यूँ डरें ज़िन्दगी में क्या होगा कुछ न होगा तो तजरबा होगा
Javed Akhtar
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अब उस की शादी का क़िस्सा न छेड़ो बस इतना कह दो कैसी लग रही थी
Zubair Ali Tabish
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मैं अगर अपनी जवानी के सुना दूँ क़िस्से ये जो लौंडे हैं मेरे पाँव दबाने लग जाए
Mehshar Afridi
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मैं क्या कहूँ के मुझे सब्र क्यूँँ नहीं आता मैं क्या करूँँ के तुझे देखने की आदत है
Ahmad Faraz
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कौन सी बात है तुम में ऐसी इतने अच्छे क्यूँँ लगते हो
Mohsin Naqvi
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हुआ टुकड़े वहम जब ये कहा उस ने तुम्हीं सब कुछ हो लेकिन मेरा इश्क़ नहीं
Parul Singh "Noor"
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रोज़ ढक लेती थी नीला जिस्म अपना शुक्र है आ गई बाहर घर की बातें
Parul Singh "Noor"
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सभी रिश्तें मैं यूँँ बचाए हूँ जैसे तड़पते दियों को हवा देते रहना
Parul Singh "Noor"
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जो सारे ज़ख़्म मेरे भर दिया करता उसी के नाम का ख़ंजर बनाया है
Parul Singh "Noor"
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सूख जाता जल्द है फिर भी निशानी के लिए फूल इक छुप के किताबों में छिपाना इश्क़ है
Parul Singh "Noor"
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