गर ये अच्छी क़िस्मत है तो लानत ऐसी क़िस्मत पर अपने फोन में देख रहे हैं, बाप को बूढ़ा होते हम
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उस के होंटों पे रख के होंट अपने बात ही हम तमाम कर रहे हैं
Jaun Elia
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कौन सी बात है तुम में ऐसी इतने अच्छे क्यूँँ लगते हो
Mohsin Naqvi
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तेरा बनता था कि तू दुश्मन हो अपने हाथों से खिलाया था तुझे तेरी गाली से मुझे याद आया कितने तानों से बचाया था तुझे
Ali Zaryoun
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वो आए घर में हमारे ख़ुदा की क़ुदरत है कभी हम उन को कभी अपने घर को देखते हैं
Mirza Ghalib
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हम ने अच्छी धाँक जमा रक्खी थी अपनी फिर उस ने छोड़ा और सब पानी कर डाला
Prashant Sharma Daraz
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तू बुझा कर रख गया था जबसे इस दिल के चराग़ हम ने इस घर में नहीं की रौशनाई आज तक
Siddharth Saaz
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ये आसमाँ में कोई बुत बैठा भी है कि नईं या हम ज़मीं के लोग यूँँ ही चीखते हैं बस
Siddharth Saaz
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`तू मेरे पास आ कर बैठ मुझ सेे बात कर ऐ दोस्त ये मुमकिन है कोई दरिया ख़राबों से निकल आए
Siddharth Saaz
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ये ग़म हम को पत्थर कर देगा इक दिन कोई आ कर हमें रुलाओ पहले तो
Siddharth Saaz
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चारा-गर तो तभी बचा पाएँगे ना चारा-गर की जान बचाओ पहले तो
Siddharth Saaz
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