ग़रीब लोग कहाँ ख़ुद को बचा पाएँगे वबास बच भी गए भूख से मर जाएँगे
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मेरी तन्हाई देखेंगे तो हैरत ही करेंगे लोग मोहब्बत छोड़ देंगे या मोहब्बत ही करेंगे लोग
Ismail Raaz
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एक आवाज़ कि जो मुझ को बचा लेती है ज़िन्दगी आख़री लम्हों में मना लेती है जिस पे मरती हो उसे मुड़ के नहीं देखती वो और जिसे मारना हो यार बना लेती है
Ali Zaryoun
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कुछ न कुछ बोलते रहो हम सेे चुप रहोगे तो लोग सुन लेंगे
Fahmi Badayuni
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किताब फ़िल्म सफ़र इश्क़ शा'इरी औरत कहाँ कहाँ न गया ख़ुद को ढूँढ़ता हुआ मैं
Jawwad Sheikh
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ख़ुद को इतना भी मत बचाया कर बारिशें हों तो भीग जाया कर काम ले कुछ हसीन होंठों से बातों बातों में मुस्कुराया कर
Shakeel Azmi
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सौ ज़ख़्म भर चुके हों मगर कह सकें ग़ज़ल इतनी कमी तो आज भी रहती है तेरे बिन
Astitwa Ankur
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शे'र कहते हैं कई लोग मज़ा देते हैं हम मगर वो हैं जो दीवाना बना देते हैं
Astitwa Ankur
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आज के दिन कभी सीने से लगाते थे तुम्हें और अब तुम को बधाई भी नहीं दे सकते
Astitwa Ankur
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कम अगर हो भी गया कौन सी हद तक होगा दर्द है टूट के आधा तो नहीं हो सकता
Astitwa Ankur
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आख़िरी पन्ने पे बोलो क्या लिखूँ तुम यहाँ तक साथ तो आए नहीं
Astitwa Ankur
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