आज के दिन कभी सीने से लगाते थे तुम्हें और अब तुम को बधाई भी नहीं दे सकते
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कुछ न रह सका जहाँ विरानियाँ तो रह गईं तुम चले गए तो क्या कहानियाँ तो रह गईं
Khalil Ur Rehman Qamar
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ज़रा ठहरो कि शब फीकी बहुत है तुम्हें घर जाने की जल्दी बहुत है ज़रा नज़दीक आ कर बैठ जाओ तुम्हारे शहर में सर्दी बहुत है
Zubair Ali Tabish
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मैं चाहता हूँ मोहब्बत मेरा वो हाल करे कि ख़्वाब में भी दोबारा कभी मजाल न हो
Jawwad Sheikh
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या'नी तुम वो हो वाक़ई हद है मैं तो सच-मुच सभी को भूल गया
Jaun Elia
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प्यार दो बार थोड़ी होता है हो तो फिर प्यार थोड़ी होता है यही बेहतर है तुम उसे रोको मुझ सेे इनकार थोड़ी होता है
Zubair Ali Tabish
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सौ ज़ख़्म भर चुके हों मगर कह सकें ग़ज़ल इतनी कमी तो आज भी रहती है तेरे बिन
Astitwa Ankur
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ग़रीब लोग कहाँ ख़ुद को बचा पाएँगे वबास बच भी गए भूख से मर जाएँगे
Astitwa Ankur
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कम अगर हो भी गया कौन सी हद तक होगा दर्द है टूट के आधा तो नहीं हो सकता
Astitwa Ankur
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आख़िरी पन्ने पे बोलो क्या लिखूँ तुम यहाँ तक साथ तो आए नहीं
Astitwa Ankur
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ये हुनर जो आ जाए, आप का ज़माना है पाँव किस के छूने हैं, सर कहाँ झुकाना है
Astitwa Ankur
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