ये हुनर जो आ जाए, आप का ज़माना है पाँव किस के छूने हैं, सर कहाँ झुकाना है
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शायद मुझे किसी से मोहब्बत नहीं हुई लेकिन यक़ीन सब को दिलाता रहा हूँ मैं
Jaun Elia
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बिछड़ कर उस का दिल लग भी गया तो क्या लगेगा वो थक जाएगा और मेरे गले से आ लगेगा मैं मुश्किल में तुम्हारे काम आऊँ या ना आऊँ मुझे आवाज़ दे लेना तुम्हें अच्छा लगेगा
Tehzeeb Hafi
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किसी को घर से निकलते ही मिल गई मंज़िल कोई हमारी तरह उम्र भर सफ़र में रहा
Ahmad Faraz
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मुझ से मत पूछो के उस शख़्स में क्या अच्छा है अच्छे अच्छों से मुझे मेरा बुरा अच्छा है किस तरह मुझ से मुहब्बत में कोई जीत गया ये न कह देना के बिस्तर में बड़ा अच्छा है
Tehzeeb Hafi
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हम वो हैं जो ख़ुदा को भूल गए तुम मेरी जान किस गुमान में हो
Jaun Elia
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सौ ज़ख़्म भर चुके हों मगर कह सकें ग़ज़ल इतनी कमी तो आज भी रहती है तेरे बिन
Astitwa Ankur
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आख़िरी पन्ने पे बोलो क्या लिखूँ तुम यहाँ तक साथ तो आए नहीं
Astitwa Ankur
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ग़रीब लोग कहाँ ख़ुद को बचा पाएँगे वबास बच भी गए भूख से मर जाएँगे
Astitwa Ankur
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आज के दिन कभी सीने से लगाते थे तुम्हें और अब तुम को बधाई भी नहीं दे सकते
Astitwa Ankur
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कम अगर हो भी गया कौन सी हद तक होगा दर्द है टूट के आधा तो नहीं हो सकता
Astitwa Ankur
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