ग़म की चिंगारियों को हवा दीजिए दीजिए दीजिए बद-दुआ दीजिए
Related Sher
दिल ना-उमीद तो नहीं नाकाम ही तो है लंबी है ग़म की शाम मगर शाम ही तो है
Faiz Ahmad Faiz
267 likes
तरीक़े और भी हैं इस तरह परखा नहीं जाता चराग़ों को हवा के सामने रक्खा नहीं जाता मोहब्बत फ़ैसला करती है पहले चंद लम्हों में जहाँ पर इश्क़ होता है वहाँ सोचा नहीं जाता
Abrar Kashif
130 likes
हम इक ही लौ में जलाते रहे ग़ज़ल अपनी नई हवा से बचाते रहे ग़ज़ल अपनी दरअस्ल उस को फ़क़त चाय ख़त्म करनी थी हम उस के कप को सुनाते रहे ग़ज़ल अपनी
Zubair Ali Tabish
68 likes
नए दौर के नए ख़्वाब हैं नए मौसमों के गुलाब हैं ये मोहब्बतों के चराग़ हैं इन्हें नफ़रतों की हवा न दे
Bashir Badr
55 likes
ग़म-ए-फ़ुर्क़त का शिकवा करने वाली मेरी मौजूदगी में सो रही है
Jaun Elia
130 likes
More from Raj
उस जगह पे इन उजालों ने की होगी ख़ुद-कुशी जिस जगह मश्कूक हालत में मिला उल्टा दिया
Raj
1 likes
बदलना गर बुराई का सबब है तो अपने चेहरे में कालिख़ लगा लो
Raj
1 likes
हम एक दूजे का किरदार ही तो जी रहे हैं मैं अगले साल कोई हूँ तू अगले साल कोई
Raj
1 likes
सबने उस के चू में को चूमा है लेकिन आख़िर वाले शख़्स ने थोड़े को चूमा है उस ने महफ़िल में जिस बच्चे को चूमा था सबने महफ़िल में उस बच्चे को चूमा है
Raj
1 likes
अब के रमज़ान खुले राज़ कई रोज़ों के साथ कम से कम एक क़सम तो मिले खाने के लिए
Raj
1 likes
Similar Writers
Our suggestions based on Raj.
Similar Moods
More moods that pair well with Raj's sher.







