अब के रमज़ान खुले राज़ कई रोज़ों के साथ कम से कम एक क़सम तो मिले खाने के लिए
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तुम बहुत ख़ुश रहोगी मेरे साथ वैसे हर इक की अपनी मर्ज़ी है
Tehzeeb Hafi
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मैं ने उस सेे प्यार किया है मिल्किय्यत का दावा नइँ वो जिस के भी साथ है मैं उस को भी अपना मानता हूँ
Ali Zaryoun
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तुम भी उल्टी उल्टी बातें पूछते हो हम भी कैसी कैसी क़स में खाते हैं
Baqi Siddiqui
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हवा चली तो उस की शॉल मेरी छत पे आ गिरी ये उस बदन के साथ मेरा पहला राब्ता हुआ
Zia Mazkoor
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चुप रहते हैं चुप रहने दो राज़ बताओ खोले क्या बात वफ़ा की तुम करती हो बोलो हम कुछ बोले क्या उल्फ़त तो अफ़साना है तुम करती खूब सियासत हो हम भी हैं मक़बूल बहुत अब बोल किसी के होलें क्या
Anand Raj Singh
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आजिज़ हूँ ऐ ख़ुदा ज़बाँ के इख़्तिलाफ़ से क़ुरआन भी है काफ़ से काफ़िर भी काफ़ से
Raj
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वो सब सेे पहला लकड़हारा कौन होगा गर शजर को काट के कुल्हाड़ियाँ बनाते हैं
Raj
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वो दिल की बातें जब दिल में रखती थी मैं दिल से करता था तब दिल की बातें मैं महफ़िल में करता हूँ उस की ही बात वो मुझ सेे करती है महफ़िल की बातें
Raj
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वो दोस्त बन गई है आशना बनाना है पहाड़ काट दिया रास्ता बनाना है
Raj
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नाम का मेरे अलम फ़हराने को बोला गया था देखते ही देखते सबके दिलों में आ गया मैं
Raj
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