हवा चली तो उस की शॉल मेरी छत पे आ गिरी ये उस बदन के साथ मेरा पहला राब्ता हुआ
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उन के गेसू खुलें तो यार बने बात मेरी इक रबर बैंड ने जकड़ी हुई है रात मेरी
Zubair Ali Tabish
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भीगीं पलकें देख कर तू क्यूँँ रुका है ख़ुश हूँ मैं वो तो मेरी आँख में कुछ आ गया है ख़ुश हूँ मैं वो किसी के साथ ख़ुश था कितने दुख की बात थी अब मेरे पहलू में आ कर रो रहा है ख़ुश हूँ मैं
Zubair Ali Tabish
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मैं जब मर जाऊँ तो मेरी अलग पहचान लिख देना लहू से मेरी पेशानी पे हिंदुस्तान लिख देना
Rahat Indori
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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मेरी तन्हाई देखेंगे तो हैरत ही करेंगे लोग मोहब्बत छोड़ देंगे या मोहब्बत ही करेंगे लोग
Ismail Raaz
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आप का काम हो गया साहब लाश दरिया में फेंक दी मैं ने
Zia Mazkoor
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कोई कहता नहीं था लौट आओ कि हम पैसे ही इतने भेजते थे तुम्हारा शुक्रिया ऐ डूबती नाव कि हम भी तैरना भूले हुए थे
Zia Mazkoor
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जगह जगह न तअल्लुक़ ख़राब कर मेरा तेरे लिए तो किसी से भी लड़ पड़ूँगा मैं
Zia Mazkoor
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यहाँ से जाने की जल्दी किस को है तुम बताओ ये सूटकेसों में कपड़े किस ने रखे हुए हैं करा तो लूँगा इलाक़ा ख़ाली मैं लड़-झगड़ कर मगर जो उस ने दिलों पे क़ब्ज़े किए हुए हैं
Zia Mazkoor
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मैं उन्हीं आबादियों में जी रहा होता कहीं तुम अगर हँसते नहीं उस दिन मेरी तक़दीर पर
Zia Mazkoor
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