आजिज़ हूँ ऐ ख़ुदा ज़बाँ के इख़्तिलाफ़ से क़ुरआन भी है काफ़ से काफ़िर भी काफ़ से
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बिछड़ गए तो ये दिल उम्र भर लगेगा नहीं लगेगा लगने लगा है मगर लगेगा नहीं नहीं लगेगा उसे देख कर मगर ख़ुश है मैं ख़ुश नहीं हूँ मगर देख कर लगेगा नहीं
Umair Najmi
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ये दुख अलग है कि उस सेे मैं दूर हो रहा हूँ ये ग़म जुदा है वो ख़ुद मुझे दूर कर रहा है तेरे बिछड़ने पर लिख रहा हूँ मैं ताज़ा ग़ज़लें ये तेरा ग़म है जो मुझ को मशहूर कर रहा है
Tehzeeb Hafi
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शायद मुझे किसी से मोहब्बत नहीं हुई लेकिन यक़ीन सब को दिलाता रहा हूँ मैं
Jaun Elia
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हम वो हैं जो ख़ुदा को भूल गए तुम मेरी जान किस गुमान में हो
Jaun Elia
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मैं चाहता हूँ मोहब्बत मेरा वो हाल करे कि ख़्वाब में भी दोबारा कभी मजाल न हो
Jawwad Sheikh
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ग़म की चिंगारियों को हवा दीजिए दीजिए दीजिए बद-दुआ दीजिए
Raj
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वो सब सेे पहला लकड़हारा कौन होगा गर शजर को काट के कुल्हाड़ियाँ बनाते हैं
Raj
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अब के रमज़ान खुले राज़ कई रोज़ों के साथ कम से कम एक क़सम तो मिले खाने के लिए
Raj
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हर किसी की गोद में बच्चे नहीं आते कभी इस नदामत से मिरी बाँहें तिरी सी रह गईं
Raj
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सबने उस के चू में को चूमा है लेकिन आख़िर वाले शख़्स ने थोड़े को चूमा है उस ने महफ़िल में जिस बच्चे को चूमा था सबने महफ़िल में उस बच्चे को चूमा है
Raj
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