हर किसी की गोद में बच्चे नहीं आते कभी इस नदामत से मिरी बाँहें तिरी सी रह गईं
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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शाख़ों से टूट जाएँ वो पत्ते नहीं हैं हम आँधी से कोई कह दे कि औक़ात में रहे
Rahat Indori
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तेरी सूरत से है आलम में बहारों को सबात तेरी आँखों के सिवा दुनिया में रक्खा क्या है
Faiz Ahmad Faiz
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सोचूँ तो सारी उम्र मोहब्बत में कट गई देखूँ तो एक शख़्स भी मेरा नहीं हुआ
Jaun Elia
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मुद्दतें गुज़र गई 'हिसाब' नहीं किया न जाने अब किस के कितने रह गए हम
Kumar Vishwas
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ग़म की चिंगारियों को हवा दीजिए दीजिए दीजिए बद-दुआ दीजिए
Raj
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उस की पाकीज़ा जवानी पर्दे की पाबंद होगी किस ने सोचा था कि मंदिर में कभी ताले लगेंगे
Raj
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वो सब सेे पहला लकड़हारा कौन होगा गर शजर को काट के कुल्हाड़ियाँ बनाते हैं
Raj
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आजिज़ हूँ ऐ ख़ुदा ज़बाँ के इख़्तिलाफ़ से क़ुरआन भी है काफ़ से काफ़िर भी काफ़ से
Raj
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हम एक दूजे का किरदार ही तो जी रहे हैं मैं अगले साल कोई हूँ तू अगले साल कोई
Raj
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