सबने उस के चू में को चूमा है लेकिन आख़िर वाले शख़्स ने थोड़े को चूमा है उस ने महफ़िल में जिस बच्चे को चूमा था सबने महफ़िल में उस बच्चे को चूमा है
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शाख़ों से टूट जाएँ वो पत्ते नहीं हैं हम आँधी से कोई कह दे कि औक़ात में रहे
Rahat Indori
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तेरी सूरत से है आलम में बहारों को सबात तेरी आँखों के सिवा दुनिया में रक्खा क्या है
Faiz Ahmad Faiz
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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हम को मालूम है जन्नत की हक़ीक़त लेकिन दिल के ख़ुश रखने को 'ग़ालिब' ये ख़याल अच्छा है
Mirza Ghalib
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अगर तुम हो तो घबराने की कोई बात थोड़ी है ज़रा सी बूँदा-बाँदी है बहुत बरसात थोड़ी है ये राह-ए-इश्क़ है इस में क़दम ऐसे ही उठते हैं मोहब्बत सोचने वालों के बस की बात थोड़ी है
Abrar Kashif
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अब के रमज़ान खुले राज़ कई रोज़ों के साथ कम से कम एक क़सम तो मिले खाने के लिए
Raj
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ग़म की चिंगारियों को हवा दीजिए दीजिए दीजिए बद-दुआ दीजिए
Raj
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वो तारे गिरने पे ख़्वाहिश करती है मैं तारे गिरने की ख़्वाहिश करता हूँ
Raj
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हम एक दूजे का किरदार ही तो जी रहे हैं मैं अगले साल कोई हूँ तू अगले साल कोई
Raj
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वो मिरी बाहों में बे-फ़िक्र मुलव्विस हुई है कब्र पे हार कोई फूलों का रक्खा हुआ है
Raj
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