घर से मस्जिद है बहुत दूर चलो यूँँ कर लें किसी रोते हुए बच्चे को हँसाया जाए
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इलाज अपना कराते फिर रहे हो जाने किस किस से मोहब्बत कर के देखो ना मोहब्बत क्यूँँ नहीं करते
Farhat Ehsaas
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तुम उन के वा'दे का ज़िक्र उन से क्यूँँ करो 'ग़ालिब' ये क्या कि तुम कहो और वो कहें कि याद नहीं
Mirza Ghalib
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सुहागन भी बता देगी मगर तुम पूछो विधवा से ये मंगलसूत्र ज़ेवर के अलावा भी बहुत कुछ है ये क्या इक मक़बरे को आख़री हद मान बैठे हो मोहब्बत संग-ए-मरमर के अलावा भी बहुत कुछ है
Zubair Ali Tabish
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लोग हर मोड़ पे रुक रुक के सँभलते क्यूँँ हैं इतना डरते हैं तो फिर घर से निकलते क्यूँँ हैं मोड़ होता है जवानी का सँभलने के लिए और सब लोग यहीं आ के फिसलते क्यूँँ हैं
Rahat Indori
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तुम्हें इक मश्वरा दूँ सादगी से कह दो दिल की बात बहुत तैयारियाँ करने में गाड़ी छूट जाती है
Zubair Ali Tabish
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घी मिस्री भी भेज कभी अख़बारों में कई दिनों से चाय है कड़वी या अल्लाह
Nida Fazli
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ज़िन्दगी का मुक़द्दर सफ़र-दर-सफ़र आख़िरी साँस तक बे-क़रार आदमी
Nida Fazli
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नक़्शा उठा के और कोई शहर देखिए इस शहर में तो सब से मुलाक़ात हो गई
Nida Fazli
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इतना सच बोल कि होंटों का तबस्सुम न बुझे रौशनी ख़त्म न कर आगे अँधेरा होगा
Nida Fazli
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उस को रुख़्सत तो किया था मुझे मालूम न था सारा घर ले गया घर छोड़ के जाने वाला
Nida Fazli
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