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ग़ज़ल किताब तसव्वुर ख़िज़ाँ अकेलापन मिरे नसीब में कितनी अजीब चीज़ें हैं

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वफ़ा थी इश्क़ था मासूमियत थी तुम्हारे बा'द सब कुछ मर गया है

Praveen Sharma SHAJAR

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ये वो धूप है जिस से दिल को सिर्फ़ भिगोया जा सकता है ये वो नशेमन जिस में केवल ग़म को संजोया जा सकता है जॉन की ग़ज़लें पढ़ने लगे हो तो फिर इतना ध्यान में रखना जॉन की ग़ज़लें पढ़ लेने पर केवल रोया जा सकता है

Praveen Sharma SHAJAR

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उस के बिन तुम रह सकते हो समझो मत ख़ुद को शाइ'र कह सकते हो समझो मत सब को अपना समझा तब ये समझा है सब को अपना कह सकते हो समझो मत

Praveen Sharma SHAJAR

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तेरे ख़िलाफ़ अगर जंग में उतारा गया तो साफ़-साफ़ समझ ले कि मैं तो मारा गया वो जब गया था तो कुछ भी नहीं गया था मेरा जब उस की याद गई है तो हर सहारा गया

Praveen Sharma SHAJAR

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रास आए न मुहब्बत तो भला क्या कीजे अब जो होता ही नहीं पास-ए-वफ़ा क्या कीजे उन को हाकिम की ज़रूरत जो अभी ज़िंदा हैं मुझ सी जलती हुई लाशों की दवा क्या कीजे

Praveen Sharma SHAJAR

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