रास आए न मुहब्बत तो भला क्या कीजे अब जो होता ही नहीं पास-ए-वफ़ा क्या कीजे उन को हाकिम की ज़रूरत जो अभी ज़िंदा हैं मुझ सी जलती हुई लाशों की दवा क्या कीजे
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ये मुझे चैन क्यूँ नहीं पड़ता एक ही शख़्स था जहान में क्या
Jaun Elia
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ख़ुदी को कर बुलंद इतना कि हर तक़दीर से पहले ख़ुदा बंदे से ख़ुद पूछे बता तेरी रज़ा क्या है
Allama Iqbal
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तुम्हें हुस्न पर दस्तरस है मोहब्बत वोहब्बत बड़ा जानते हो तो फिर ये बताओ कि तुम उस की आँखों के बारे में क्या जानते हो ये जुग़राफ़िया फ़ल्सफ़ा साईकॉलोजी साइंस रियाज़ी वग़ैरा ये सब जानना भी अहम है मगर उस के घर का पता जानते हो
Tehzeeb Hafi
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तरीक़े और भी हैं इस तरह परखा नहीं जाता चराग़ों को हवा के सामने रक्खा नहीं जाता मोहब्बत फ़ैसला करती है पहले चंद लम्हों में जहाँ पर इश्क़ होता है वहाँ सोचा नहीं जाता
Abrar Kashif
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क्या ख़बर कौन था वो, और मेरा क्या लगता था जिस सेे मिल कर मुझे, हर शख़्स बुरा लगता था
Tehzeeb Hafi
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ये वो धूप है जिस से दिल को सिर्फ़ भिगोया जा सकता है ये वो नशेमन जिस में केवल ग़म को संजोया जा सकता है जॉन की ग़ज़लें पढ़ने लगे हो तो फिर इतना ध्यान में रखना जॉन की ग़ज़लें पढ़ लेने पर केवल रोया जा सकता है
Praveen Sharma SHAJAR
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उस के बिन तुम रह सकते हो समझो मत ख़ुद को शाइ'र कह सकते हो समझो मत सब को अपना समझा तब ये समझा है सब को अपना कह सकते हो समझो मत
Praveen Sharma SHAJAR
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वफ़ा थी इश्क़ था मासूमियत थी तुम्हारे बा'द सब कुछ मर गया है
Praveen Sharma SHAJAR
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यूँँ तो हम जन्नत का रस्ता जानते हैं पर मय-ख़ाना उस सेे अच्छा जानते हैं डूब रहे हैं दरिया में तेरी ख़ातिर वरना हम तो पार उतरना जानते हैं
Praveen Sharma SHAJAR
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फूल टूटे तो रौंद डाले गए ख़ार गिरकर भी घाव दे रहे हैं
Praveen Sharma SHAJAR
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