ग़ज़ल को कुछ नए चेहरे नए अश'आर देता हूँ मैं यूँँ अल्फ़ाज़ के ख़ंजर को अपने धार देता हूँ कभी जब तैश में चाहूँ किसी का क़त्ल करना मैं तो फिर ग़ुस्से में आ कर शे'र कोई मार देता हूँ
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बिछड़ गए तो ये दिल उम्र भर लगेगा नहीं लगेगा लगने लगा है मगर लगेगा नहीं नहीं लगेगा उसे देख कर मगर ख़ुश है मैं ख़ुश नहीं हूँ मगर देख कर लगेगा नहीं
Umair Najmi
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शायद मुझे किसी से मोहब्बत नहीं हुई लेकिन यक़ीन सब को दिलाता रहा हूँ मैं
Jaun Elia
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गले मिलना न मिलना तो तेरी मर्ज़ी है लेकिन तेरे चेहरे से लगता है तेरा दिल कर रहा है
Tehzeeb Hafi
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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कुछ न कुछ बोलते रहो हम सेे चुप रहोगे तो लोग सुन लेंगे
Fahmi Badayuni
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मुसन्निफ़ हूँ मगर किरदार होता जा रहा हूँ तसल्लुत अपने ही लिक्खे पे खोता जा रहा हूँ कहानी में तो इक अंजाम अच्छा ही लिखा था उसी अंजाम पर पैहम मैं रोता जा रहा हूँ
Saurabh Mehta 'Alfaaz'
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यार सारे, सारे आशिक़ और पुराने मुँह लगे अब ये कहते फिर रहे हैं कौन उस के मुँह लगे
Saurabh Mehta 'Alfaaz'
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ये जो इश्क़–ओ–उल्फ़त वाली भोली-भाली बातें हैं सुन तुझ को इक बात बताऊँ सारी ख़ाली बातें हैं हाँ इक ऐसा दौर था जिस में बातें ख़त्म न होती थीं अब बातें होने की बातें सिर्फ़ ख़याली बातें हैं
Saurabh Mehta 'Alfaaz'
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उन्हें खो कर ये माना हम सिफ़र हैं मुयस्सर पर उन्हें भी हम कहाँ हैं
Saurabh Mehta 'Alfaaz'
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रंजिशों की आतिशों में सारी बस्ती जल रही थी वो फ़क़त अपनी ही ज़िद में घर को फूँके जा रहे थे
Saurabh Mehta 'Alfaaz'
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