sherKuch Alfaaz

मुसन्निफ़ हूँ मगर किरदार होता जा रहा हूँ तसल्लुत अपने ही लिक्खे पे खोता जा रहा हूँ कहानी में तो इक अंजाम अच्छा ही लिखा था उसी अंजाम पर पैहम मैं रोता जा रहा हूँ

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जो ख़ानदानी रईस हैं वो मिज़ाज रखते हैं नर्म अपना तुम्हारा लहजा बता रहा है, तुम्हारी दौलत नई नई है

Shabeena Adeeb

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ये दुख अलग है कि उस सेे मैं दूर हो रहा हूँ ये ग़म जुदा है वो ख़ुद मुझे दूर कर रहा है तेरे बिछड़ने पर लिख रहा हूँ मैं ताज़ा ग़ज़लें ये तेरा ग़म है जो मुझ को मशहूर कर रहा है

Tehzeeb Hafi

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इक हुनर है जो कर गया हूँ मैं सब के दिल से उतर गया हूँ मैं

Jaun Elia

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तरीक़े और भी हैं इस तरह परखा नहीं जाता चराग़ों को हवा के सामने रक्खा नहीं जाता मोहब्बत फ़ैसला करती है पहले चंद लम्हों में जहाँ पर इश्क़ होता है वहाँ​ सोचा नहीं जाता

Abrar Kashif

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मैं चाहता हूँ मोहब्बत मेरा वो हाल करे कि ख़्वाब में भी दोबारा कभी मजाल न हो

Jawwad Sheikh

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यार सारे, सारे आशिक़ और पुराने मुँह लगे अब ये कहते फिर रहे हैं कौन उस के मुँह लगे

Saurabh Mehta 'Alfaaz'

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ये जो इश्क़–ओ–उल्फ़त वाली भोली-भाली बातें हैं सुन तुझ को इक बात बताऊँ सारी ख़ाली बातें हैं हाँ इक ऐसा दौर था जिस में बातें ख़त्म न होती थीं अब बातें होने की बातें सिर्फ़ ख़याली बातें हैं

Saurabh Mehta 'Alfaaz'

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कौन छेड़े फिर वही क़िस्सा पुराना आतिशों का काम है जलना जलाना

Saurabh Mehta 'Alfaaz'

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उन्हें खो कर ये माना हम सिफ़र हैं मुयस्सर पर उन्हें भी हम कहाँ हैं

Saurabh Mehta 'Alfaaz'

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ग़ज़ल को कुछ नए चेहरे नए अश'आर देता हूँ मैं यूँँ अल्फ़ाज़ के ख़ंजर को अपने धार देता हूँ कभी जब तैश में चाहूँ किसी का क़त्ल करना मैं तो फिर ग़ुस्से में आ कर शे'र कोई मार देता हूँ

Saurabh Mehta 'Alfaaz'

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