ये जो इश्क़–ओ–उल्फ़त वाली भोली-भाली बातें हैं सुन तुझ को इक बात बताऊँ सारी ख़ाली बातें हैं हाँ इक ऐसा दौर था जिस में बातें ख़त्म न होती थीं अब बातें होने की बातें सिर्फ़ ख़याली बातें हैं
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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ये अलग बात कि ख़ामोश खड़े रहते हैं फिर भी जो लोग बड़े हैं, वो बड़े रहते हैं
Rahat Indori
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शाख़ों से टूट जाएँ वो पत्ते नहीं हैं हम आँधी से कोई कह दे कि औक़ात में रहे
Rahat Indori
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ये शहर-ए-अजनबी में अब किसे जा कर बताएँ हम कहाँ के रहने वाले हैं कहाँ की याद आती है
Ashu Mishra
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कैसा दिल और इस के क्या ग़म जी यूँँ ही बातें बनाते हैं हम जी
Jaun Elia
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यार सारे, सारे आशिक़ और पुराने मुँह लगे अब ये कहते फिर रहे हैं कौन उस के मुँह लगे
Saurabh Mehta 'Alfaaz'
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तल्ख़ फब्तियाँ तीखी बातें उस पर तंज़ भरे अश'आर उन के लब हरकत में आए शहद घुल गया कानों में
Saurabh Mehta 'Alfaaz'
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शब पिघलेगी लम्हा-लम्हा, गहराएगी और सियाही रौशन रखना यादें सारी, वस्ल बुझे तो हिज्र जलाना
Saurabh Mehta 'Alfaaz'
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रंजिशों की आतिशों में सारी बस्ती जल रही थी वो फ़क़त अपनी ही ज़िद में घर को फूँके जा रहे थे
Saurabh Mehta 'Alfaaz'
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एक तरीक़ा बर्बादी का, हम ने यूँँ ईजाद किया शब भर तन्हा-तन्हा रोए, मायूसी को शाद किया
Saurabh Mehta 'Alfaaz'
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