sherKuch Alfaaz

एक तरीक़ा बर्बादी का, हम ने यूँँ ईजाद किया शब भर तन्हा-तन्हा रोए, मायूसी को शाद किया

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उलझ कर के तेरी ज़ुल्फ़ों में यूँँ आबाद हो जाऊँ कि जैसे लखनऊ का मैं अमीनाबाद हो जाऊँ मैं यमुना की तरह तन्हा निहारूँ ताज को कब तक कोई गंगा मिले तो मैं इलाहाबाद हो जाऊँ

Ashraf Jahangeer

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न जाने क्यूँँ गले से लगने की हिम्मत नहीं होती न जाने क्यूँँ पिता के सामने बेटे नहीं खुलते

Kushal Dauneria

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भीगीं पलकें देख कर तू क्यूँँ रुका है ख़ुश हूँ मैं वो तो मेरी आँख में कुछ आ गया है ख़ुश हूँ मैं वो किसी के साथ ख़ुश था कितने दुख की बात थी अब मेरे पहलू में आ कर रो रहा है ख़ुश हूँ मैं

Zubair Ali Tabish

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तुम अगर साथ देने का वा'दा करो मैं यूँँही मस्त नग़्में लुटाता रहूँ तुम मुझे देख कर मुस्कुराती रहो मैं तुम्हें देख कर गीत गाता रहूँ

Sahir Ludhianvi

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बहुत मुश्किल है कोई यूँँ वतन की जान हो जाए तुम्हें फैला दिया जाए तो हिन्दुस्तान हो जाए

Kumar Vishwas

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ग़ज़ल को कुछ नए चेहरे नए अश'आर देता हूँ मैं यूँँ अल्फ़ाज़ के ख़ंजर को अपने धार देता हूँ कभी जब तैश में चाहूँ किसी का क़त्ल करना मैं तो फिर ग़ुस्से में आ कर शे'र कोई मार देता हूँ

Saurabh Mehta 'Alfaaz'

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ख़ालीपन में काम हमारा फ़िक्र तुम्हारी ज़िक्र तुम्हारा गुज़रा वक़्त इसी में सारा फ़िक्र तुम्हारी ज़िक्र तुम्हारा ग़ालिब ने क्या ख़ूब कहा था इश्क़ निकम्मा कर डालेगा इस धंधे में सिर्फ़ ख़सारा फ़िक्र तुम्हारी ज़िक्र तुम्हारा

Saurabh Mehta 'Alfaaz'

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उन्हें खो कर ये माना हम सिफ़र हैं मुयस्सर पर उन्हें भी हम कहाँ हैं

Saurabh Mehta 'Alfaaz'

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तल्ख़ फब्तियाँ तीखी बातें उस पर तंज़ भरे अश'आर उन के लब हरकत में आए शहद घुल गया कानों में

Saurabh Mehta 'Alfaaz'

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शब पिघलेगी लम्हा-लम्हा, गहराएगी और सियाही रौशन रखना यादें सारी, वस्ल बुझे तो हिज्र जलाना

Saurabh Mehta 'Alfaaz'

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