ग़ज़लें सुनानी हैं मुझे दो चार आप को मैं ने सुना है आप भी साहिर को पढ़ते हैं
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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ये अलग बात कि ख़ामोश खड़े रहते हैं फिर भी जो लोग बड़े हैं, वो बड़े रहते हैं
Rahat Indori
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शाख़ों से टूट जाएँ वो पत्ते नहीं हैं हम आँधी से कोई कह दे कि औक़ात में रहे
Rahat Indori
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क्या ख़बर कौन था वो, और मेरा क्या लगता था जिस सेे मिल कर मुझे, हर शख़्स बुरा लगता था
Tehzeeb Hafi
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ये मुझे चैन क्यूँ नहीं पड़ता एक ही शख़्स था जहान में क्या
Jaun Elia
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ये दिल उलझा हुआ तेरे ख़यालों में नहीं हो सकता है इस दिल का कुछ भी अब
Adarsh Akshar
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याद करता है ज़रूरत में अब कुछ भी हो सकता मुहब्बत में अब
Adarsh Akshar
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ज़िंदगी इक इम्तिहाँ है रोज़ ही मुश्किल यहाँ है
Adarsh Akshar
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ना-मुमकिन को मुमकिन करना अपने दिल की हर दिन करना
Adarsh Akshar
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कतरे से दरिया बनता है मिल कर ही रिश्ता बनता है ख़ून पसीना इक करने से मंज़िल तक रस्ता बनता है
Adarsh Akshar
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