ये दिल उलझा हुआ तेरे ख़यालों में नहीं हो सकता है इस दिल का कुछ भी अब
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किसी को घर से निकलते ही मिल गई मंज़िल कोई हमारी तरह उम्र भर सफ़र में रहा
Ahmad Faraz
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शाख़ों से टूट जाएँ वो पत्ते नहीं हैं हम आँधी से कोई कह दे कि औक़ात में रहे
Rahat Indori
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तेरी सूरत से है आलम में बहारों को सबात तेरी आँखों के सिवा दुनिया में रक्खा क्या है
Faiz Ahmad Faiz
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हम को मालूम है जन्नत की हक़ीक़त लेकिन दिल के ख़ुश रखने को 'ग़ालिब' ये ख़याल अच्छा है
Mirza Ghalib
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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ज़िंदगी इक इम्तिहाँ है रोज़ ही मुश्किल यहाँ है
Adarsh Akshar
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याद करता है ज़रूरत में अब कुछ भी हो सकता मुहब्बत में अब
Adarsh Akshar
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याद आती है तुम्हारी आज भी तुम मुझे उतनी ही प्यारी आज भी
Adarsh Akshar
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प्यार के रस्ते पे चलना है हमें अब मिल के दुनिया को बदलना है हमें अब
Adarsh Akshar
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कतरे से दरिया बनता है मिल कर ही रिश्ता बनता है ख़ून पसीना इक करने से मंज़िल तक रस्ता बनता है
Adarsh Akshar
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