गुलों में रंग भरे बाद-ए-नौ-बहार चले चले भी आओ कि गुलशन का कारोबार चले
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किसी गली में किराए पे घर लिया उस ने फिर उस गली में घरों के किराए बढ़ने लगे
Umair Najmi
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क्यूँ डरें ज़िन्दगी में क्या होगा कुछ न होगा तो तजरबा होगा
Javed Akhtar
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हज़ारों साल नर्गिस अपनी बे-नूरी पे रोती है बड़ी मुश्किल से होता है चमन में दीदा-वर पैदा
Allama Iqbal
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अगर तुम हो तो घबराने की कोई बात थोड़ी है ज़रा सी बूँदा-बाँदी है बहुत बरसात थोड़ी है ये राह-ए-इश्क़ है इस में क़दम ऐसे ही उठते हैं मोहब्बत सोचने वालों के बस की बात थोड़ी है
Abrar Kashif
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सभी का ख़ून है शामिल यहाँ की मिट्टी में किसी के बाप का हिन्दुस्तान थोड़ी है
Rahat Indori
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बोल कि लब आज़ाद हैं तेरे बोल ज़बाँ अब तक तेरी है
Faiz Ahmad Faiz
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न जाने किस लिए उम्मीद-वार बैठा हूँ इक ऐसी राह पे जो तेरी रहगुज़र भी नहीं
Faiz Ahmad Faiz
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दिल से तो हर मोआ'मला कर के चले थे साफ़ हम कहने में उन के सामने बात बदल बदल गई
Faiz Ahmad Faiz
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हम शैख़, न लीडर, न मुसाहिब, न सहाफ़ी जो ख़ुद नहीं करते वो हिदायत न करेंगे
Faiz Ahmad Faiz
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क़फ़स उदास है यारों सबास कुछ तो कहो कहीं तो बहर-ए-ख़ुदा आज ज़िक्र-ए-यार चले
Faiz Ahmad Faiz
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