गुलशन से ही दूर करोगे फूलों को या'नी चकनाचूर करोगे फूलों को तितली से बिछड़ेंगे तो मर जाएँगे क्यूँ इतना मज़बूर करोगे फूलों को
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आओ गले मिल कर ये देखें अब हम में कितनी दूरी है
Shariq Kaifi
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जौन तुम्हें ये दौर मुबारक, दूर ग़म-ए-अय्याम से हो एक पागल लड़की को भुला कर अब तो बड़े आराम से हो
Jaun Elia
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करता नहीं ख़याल तेरा इस ख़याल से तंग आ गया अगर तू मेरी देखभाल से चल मेरे साथ और तबीयत की फ़िक्र छोड़ दो मील दूर है मेरा घर अस्पताल से
Tehzeeb Hafi
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ये दुख अलग है कि उस सेे मैं दूर हो रहा हूँ ये ग़म जुदा है वो ख़ुद मुझे दूर कर रहा है तेरे बिछड़ने पर लिख रहा हूँ मैं ताज़ा ग़ज़लें ये तेरा ग़म है जो मुझ को मशहूर कर रहा है
Tehzeeb Hafi
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किसी से दूरी बनाई किसी के पास रहे हज़ार कोशिशें कर लीं मगर, उदास रहे
Sawan Shukla
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वर्ना तोहफ़े दिल्ली भेजे जाते पर चूड़ी का अपमान नहीं कर सकता मैं
Jatin shukla
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पूर्ण अधिकार जिस पर हमारा रहा एक मुखड़ा जो आँखों का तारा रहा एक लड़का बदन जिस का ब्याहा गया एक लड़का जो मन से कुँवारा रहा
Jatin shukla
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ऐसे बैठे हैं हम उस की चौखट पर प्यासा जैसे बैठा रहता पनघट पर पर्दा करना हुस्न छुपाना नइँ होता पहरे का आरोप ग़लत है घूँघट पर
Jatin shukla
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अभी तो पांँच बोसे ही हुए हैं अभी दस और दो तब फ़ोन रखना
Jatin shukla
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ज़रूरत हुक्म तो देती नहीं पर थकावट शाम को घर खींच लाती
Jatin shukla
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