ऐसे बैठे हैं हम उस की चौखट पर प्यासा जैसे बैठा रहता पनघट पर पर्दा करना हुस्न छुपाना नइँ होता पहरे का आरोप ग़लत है घूँघट पर
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ये अलग बात कि ख़ामोश खड़े रहते हैं फिर भी जो लोग बड़े हैं, वो बड़े रहते हैं
Rahat Indori
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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शाख़ों से टूट जाएँ वो पत्ते नहीं हैं हम आँधी से कोई कह दे कि औक़ात में रहे
Rahat Indori
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अगर तुम हो तो घबराने की कोई बात थोड़ी है ज़रा सी बूँदा-बाँदी है बहुत बरसात थोड़ी है ये राह-ए-इश्क़ है इस में क़दम ऐसे ही उठते हैं मोहब्बत सोचने वालों के बस की बात थोड़ी है
Abrar Kashif
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पूछते हैं वो कि ग़ालिब कौन है कोई बतलाओ कि हम बतलाएँ क्या
Mirza Ghalib
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पूर्ण अधिकार जिस पर हमारा रहा एक मुखड़ा जो आँखों का तारा रहा एक लड़का बदन जिस का ब्याहा गया एक लड़का जो मन से कुँवारा रहा
Jatin shukla
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प्राण को देह से दूरी दे देगा कल राज्य धर्म ऐसी मजबूरी दे देगा कल एक धोबी ने अपराध तय कर दिया एक राजा भी मंज़ूरी दे देगा कल
Jatin shukla
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वर्ना तोहफ़े दिल्ली भेजे जाते पर चूड़ी का अपमान नहीं कर सकता मैं
Jatin shukla
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तू हुस्ना हुस्न को महफ़ूज़ रखना मैं आशिक़ हूँ नज़र से चूम लूँगा
Jatin shukla
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मकाँ मालिक का रुत्बा चाहता है किराया-दार क़ब्ज़ा चाहता है
Jatin shukla
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