गुज़रने ही न दी वो रात मैं ने घड़ी पर रख दिया था हाथ मैं ने
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ये दुख अलग है कि उस सेे मैं दूर हो रहा हूँ ये ग़म जुदा है वो ख़ुद मुझे दूर कर रहा है तेरे बिछड़ने पर लिख रहा हूँ मैं ताज़ा ग़ज़लें ये तेरा ग़म है जो मुझ को मशहूर कर रहा है
Tehzeeb Hafi
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मर चुका है दिल मगर ज़िंदा हूँ मैं ज़हर जैसी कुछ दवाएँ चाहिए पूछते हैं आप आप अच्छे तो हैं जी मैं अच्छा हूँ दुआएँ चाहिए
Jaun Elia
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उसे किसी से मोहब्बत थी और वो मैं नहीं था ये बात मुझ सेे ज़ियादा उसे रुलाती थी
Ali Zaryoun
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गुलाब ख़्वाब दवा ज़हर जाम क्या क्या है मैं आ गया हूँ बता इंतिज़ाम क्या क्या है
Rahat Indori
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वो लड़ कर भी सो जाए तो उस का माथा चूमूँ मैं उस से मोहब्बत एक तरफ़ है उस से झगड़ा एक तरफ़
Varun Anand
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तुझ में कस-बल है तो दुनिया को बहा कर ले जा चाय की प्याली में तूफ़ान उठाता क्या है
Shahzad Ahmad
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वाक़िआ' कुछ भी हो सच कहने में रुस्वाई है क्यूँँ न ख़ामोश रहूँ अहल-ए-नज़र कहलाऊँ
Shahzad Ahmad
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ये सोच कर कि तेरी जबीं पर न बल पड़े बस दूर ही से देख लिया और चल पड़े दिल में फिर इक कसक सी उठी मुद्दतों के बा'द इक उम्र के रुके हुए आँसू निकल पड़े
Shahzad Ahmad
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मुमकिन हो आप से तो भुला दीजिए मुझे पत्थर पे हूँ लकीर मिटा दीजिए मुझे
Shahzad Ahmad
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ये समझ के माना है सच तुम्हारी बातों को इतने ख़ूब-सूरत लब झूट कैसे बोलेंगे
Shahzad Ahmad
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