गुज़िश्ता साल शायद ठीक से मारा नहीं था ये रावण इस बरस फिर सामने तनकर खड़ा है
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मेरे आँसू नहीं थम रहे कि वो मुझ सेे जुदा हो गया और तुम कह रहे हो कि छोड़ो अब ऐसा भी क्या हो गया मय-कदों में मेरी लाइनें पढ़ते फिरते हैं लोग मैं ने जो कुछ भी पी कर कहा फ़लसफ़ा हो गया
Tehzeeb Hafi
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कुछ बात है कि हस्ती मिटती नहीं हमारी सदियों रहा है दुश्मन दौर-ए-ज़माँ हमारा
Allama Iqbal
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देखो हम कोई वहशी नहीं दीवाने हैं तुम सेे बटन खुलवाने नहीं लगवाने हैं
Varun Anand
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हुआ ही क्या जो वो हमें मिला नहीं बदन ही सिर्फ़ एक रास्ता नहीं ये पहला इश्क़ है तुम्हारा सोच लो मेरे लिए ये रास्ता नया नहीं
Azhar Iqbal
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हमारे बा'द तेरे इश्क़ में नए लड़के बदन तो चू मेंगे ज़ुल्फ़ें नहीं सँवारेंगे
Vikram Gaur Vairagi
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मिले थे फरवरी में आपसे पहली दफ़ा हम तभी से दोस्ती सी हो गई है फरवरी से
Bhaskar Shukla
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चलो माना कि रोना मसअले का हल नहीं लेकिन करे भी क्या कोई जब ख़त्म हर उम्मीद हो जाए
Bhaskar Shukla
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वैसे तो उस का नाम नहीं हाफ़िज़े में अब मुमकिन है रूबरू जो कभी हो, पुकार दूँ
Bhaskar Shukla
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इन आँखों का सूनापन ये कहता है इन आँखों ने उन आँखों को देखा है
Bhaskar Shukla
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आँखें मैं ने बंद रखी हैं या'नी उन को देख रहा हूँ
Bhaskar Shukla
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