hae re majburiyan mahrumiyan nakaamiyan ishq aakhir ishq hai tum kya karo hum kya karen
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इश्क़ पर ज़ोर नहीं है ये वो आतिश 'ग़ालिब' कि लगाए न लगे और बुझाए न बने
Mirza Ghalib
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हज़ार इश्क़ करो लेकिन इतना ध्यान रहे कि तुम को पहली मोहब्बत की बद-दुआ न लगे
Abbas Tabish
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मैं कि काग़ज़ की एक कश्ती हूँ पहली बारिश ही आख़िरी है मुझे
Tehzeeb Hafi
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अगर तुम हो तो घबराने की कोई बात थोड़ी है ज़रा सी बूँदा-बाँदी है बहुत बरसात थोड़ी है ये राह-ए-इश्क़ है इस में क़दम ऐसे ही उठते हैं मोहब्बत सोचने वालों के बस की बात थोड़ी है
Abrar Kashif
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इश्क़ अगर बढ़ता है तो फिर झगड़े भी तो बढ़ते हैं आमदनी जब बढ़ती है तो ख़र्चे भी तो बढ़ते हैं माना मंज़िल नहीं मिली है हम को लेकिन रोज़ाना एक क़दम उस की जानिब हम आगे भी तो बढ़ते हैं
Tanoj Dadhich
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जहल-ए-ख़िरद ने दिन ये दिखाए घट गए इंसाँ बढ़ गए साए
Jigar Moradabadi
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जो उन पे गुज़रती है किस ने उसे जाना है अपनी ही मुसीबत है अपना ही फ़साना है
Jigar Moradabadi
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या वो थे ख़फ़ा हम से या हम हैं ख़फ़ा उन से कल उन का ज़माना था आज अपना ज़माना है
Jigar Moradabadi
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यही है ज़िंदगी तो ज़िंदगी से ख़ुद-कुशी अच्छी कि इंसाँ आलम-ए-इंसानियत पर बार हो जाए
Jigar Moradabadi
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अपना ज़माना आप बनाते हैं अहल-ए-दिल हम वो नहीं कि जिन को ज़माना बना गया
Jigar Moradabadi
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