है दुआ याद मगर हर्फ़-ए-दुआ याद नहीं मेरे नग़्मात को अंदाज़-ए-नवा याद नहीं
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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शाख़ों से टूट जाएँ वो पत्ते नहीं हैं हम आँधी से कोई कह दे कि औक़ात में रहे
Rahat Indori
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सोचूँ तो सारी उम्र मोहब्बत में कट गई देखूँ तो एक शख़्स भी मेरा नहीं हुआ
Jaun Elia
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ये मुझे चैन क्यूँ नहीं पड़ता एक ही शख़्स था जहान में क्या
Jaun Elia
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मुद्दतें गुज़र गई 'हिसाब' नहीं किया न जाने अब किस के कितने रह गए हम
Kumar Vishwas
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दो चार दिन की बात है ये ज़िंदगी की बात दो चार दिन के प्यार का क़ाइल नहीं हूँ दोस्त
Saghar Siddiqui
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एक वा'दा है किसी का जो वफ़ा होता नहीं वर्ना इन तारों भरी रातों में क्या होता नहीं
Saghar Siddiqui
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हम फ़क़ीरों की सूरतों पे न जा हम कई रूप धार लेते हैं ज़िंदगी के उदास लम्हों को मुस्कुरा कर गुज़ार लेते हैं
Saghar Siddiqui
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ऐ सितारों के चाहने वालो आँसुओं के चराग़ हाज़िर हैं रौनक़-ए-जश्न-ए-रंग-ओ-बू के लिए ज़ख़्म हाज़िर हैं दाग़ हाज़िर हैं
Saghar Siddiqui
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काँटे तो ख़ैर काँटे हैं इस का गिला ही क्या फूलों की वारदात से घबरा के पी गया
Saghar Siddiqui
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