दो चार दिन की बात है ये ज़िंदगी की बात दो चार दिन के प्यार का क़ाइल नहीं हूँ दोस्त
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ये अलग बात कि ख़ामोश खड़े रहते हैं फिर भी जो लोग बड़े हैं, वो बड़े रहते हैं
Rahat Indori
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तेरी सूरत से है आलम में बहारों को सबात तेरी आँखों के सिवा दुनिया में रक्खा क्या है
Faiz Ahmad Faiz
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हुई मुद्दत कि 'ग़ालिब' मर गया पर याद आता है वो हर इक बात पर कहना कि यूँँ होता तो क्या होता
Mirza Ghalib
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कौन सी बात है तुम में ऐसी इतने अच्छे क्यूँँ लगते हो
Mohsin Naqvi
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होश वालों को ख़बर क्या बे-ख़ुदी क्या चीज़ है इश्क़ कीजे फिर समझिए ज़िंदगी क्या चीज़ है
Nida Fazli
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एक वा'दा है किसी का जो वफ़ा होता नहीं वर्ना इन तारों भरी रातों में क्या होता नहीं
Saghar Siddiqui
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हम फ़क़ीरों की सूरतों पे न जा हम कई रूप धार लेते हैं ज़िंदगी के उदास लम्हों को मुस्कुरा कर गुज़ार लेते हैं
Saghar Siddiqui
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ऐ सितारों के चाहने वालो आँसुओं के चराग़ हाज़िर हैं रौनक़-ए-जश्न-ए-रंग-ओ-बू के लिए ज़ख़्म हाज़िर हैं दाग़ हाज़िर हैं
Saghar Siddiqui
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है दुआ याद मगर हर्फ़-ए-दुआ याद नहीं मेरे नग़्मात को अंदाज़-ए-नवा याद नहीं
Saghar Siddiqui
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काँटे तो ख़ैर काँटे हैं इस का गिला ही क्या फूलों की वारदात से घबरा के पी गया
Saghar Siddiqui
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