हाए वो तिल कि छोड़ो रहने दो ग़ैर-वाजिब है तज़किरा करना
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तिलिस्म-ए-यार ये पहलू निकाल लेता है कि पत्थरों से भी ख़ुशबू निकाल लेता है है बे-लिहाज़ कुछ ऐसा की आँख लगते ही वो सर के नीचे से बाजू निकाल लेता है
Tehzeeb Hafi
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तुम भी वैसे थे मगर तुम को ख़ुदा रहने दिया इस तरह तुम को ज़माने से जुदा रहने दिया
Khalil Ur Rehman Qamar
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इक ज़रा बात पर अपने से पराए हुए लोग हाए वो ख़ून पसीने से कमाए हुए लोग
Khan Janbaz
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इल्म जब होगा किधर जाना है हाए तब तक तो गुज़र जाना है
Madan Mohan Danish
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जबसे बोला उस ने हाए मुहब्बत से ली फिर दीवानों की राय मुहब्बत से आते देख छुपा करती थी जो लड़की उस ने आज पिलाई चाय मुहब्बत से
Rohit Gustakh
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उस ने पूछा याद हमारी आती है कोई अपनी बर्बादी को भूलता है
Upendra Bajpai
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कितनी परियों की नसीहत ले कर ऐसी आँखें बनाई जाती हैं
Upendra Bajpai
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ये जो कहने को कई लोग हैं मेरे अपने ये कई लोग तो ग़ैरों से भी वाबस्ता है
Upendra Bajpai
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अब के ऐसा हाल बनाया है मैं ने देखोगे तो सद में में आ जाओगे
Upendra Bajpai
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सोचा समझा इश्क़ नहीं करते हैं हम नादानों से नादानी हो जाती है
Upendra Bajpai
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