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हालत को मेरी देख के हँसते तो हो लेकिन हालात समझने में बहुत देर लगेगी

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न मेरा है न किसी और के बाप का सूरज है इन दिनों तो बुलंदी पे आप का सूरज गुज़र रही है शब ए ग़म इस आस में तन्हा के एक दिन तो उगेगा मिलाप का सूरज

Amaan mirza

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ये आज कल नए लौंडे हमारे शे'रों में कमी टटोलते हैं उस पे काम करते नहीं

Amaan mirza

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नज़दीक में रखा मुझे तन्हा नहीं किया कइयों ने मुझ को चाहा पर अपना नहीं किया तुम ने भी भेज दी मेरी जानिब मशकक़तें सुलझे हुए को उलझा के अच्छा नहीं किया

Amaan mirza

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मुशायरे का ये भी इक उसूल होना था कम अज़ कम आज का दिन तो फिज़ूल होना था जिस इत्मीनान से मैं ने तुम्हें सुना है दोस्त बस उतना वक़्त मुझे भी वसूल होना था

Amaan mirza

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ये सच है मुझ को दिखते नहीं तेरे ऐब-ओ-ख़म दिखने लगी हैं ख़ूबियाँ तू है मुझे पसंद

Amaan mirza

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