हम को आज़माया जा रहा था सब कुछ सच बताया जा रहा था पाबंदी सिखाई गई हमें जब तब भी वक़्त ज़ाया' जा रहा था
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बंसी सब सुर त्यागे है, एक ही सुर में बाजे है हाल न पूछो मोहन का, सब कुछ राधे राधे है
Zubair Ali Tabish
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कुछ बात है कि हस्ती मिटती नहीं हमारी सदियों रहा है दुश्मन दौर-ए-ज़माँ हमारा
Allama Iqbal
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जो ख़ानदानी रईस हैं वो मिज़ाज रखते हैं नर्म अपना तुम्हारा लहजा बता रहा है, तुम्हारी दौलत नई नई है
Shabeena Adeeb
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ये दुख अलग है कि उस सेे मैं दूर हो रहा हूँ ये ग़म जुदा है वो ख़ुद मुझे दूर कर रहा है तेरे बिछड़ने पर लिख रहा हूँ मैं ताज़ा ग़ज़लें ये तेरा ग़म है जो मुझ को मशहूर कर रहा है
Tehzeeb Hafi
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शायद मुझे किसी से मोहब्बत नहीं हुई लेकिन यक़ीन सब को दिलाता रहा हूँ मैं
Jaun Elia
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न देखो डालकर आँखों में आँखें तुम नहीं , आँखें तेरी गीली हो जाएँगी
Vivek Chaturvedi
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करते थे फ़क़त हम याद या'नी अब हम को भुलाया जा रहा था
Vivek Chaturvedi
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हो गर बराबरी में आना तो बढ़ा कद तू ये लोग, छोटा हो कद तो गले नहीं लगते
Vivek Chaturvedi
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जीने लगा हूँ मैं भी तब से मरने लगा हूँ तुझ पे जब से
Vivek Chaturvedi
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ग़लत वो था तो मैं उसे कैसे कहता उसे पहले ही मैं ज़बाँ दे चुका था
Vivek Chaturvedi
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