जीने लगा हूँ मैं भी तब से मरने लगा हूँ तुझ पे जब से
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माना कि तेरी दीद के क़ाबिल नहीं हूँ मैं तू मेरा शौक़ देख मिरा इंतिज़ार देख
Allama Iqbal
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ये दुख अलग है कि उस सेे मैं दूर हो रहा हूँ ये ग़म जुदा है वो ख़ुद मुझे दूर कर रहा है तेरे बिछड़ने पर लिख रहा हूँ मैं ताज़ा ग़ज़लें ये तेरा ग़म है जो मुझ को मशहूर कर रहा है
Tehzeeb Hafi
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उसे किसी से मोहब्बत थी और वो मैं नहीं था ये बात मुझ सेे ज़ियादा उसे रुलाती थी
Ali Zaryoun
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मेरे आँसू नहीं थम रहे कि वो मुझ सेे जुदा हो गया और तुम कह रहे हो कि छोड़ो अब ऐसा भी क्या हो गया मय-कदों में मेरी लाइनें पढ़ते फिरते हैं लोग मैं ने जो कुछ भी पी कर कहा फ़लसफ़ा हो गया
Tehzeeb Hafi
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कोई इतना प्यारा कैसे हो सकता है फिर सारे का सारा कैसे हो सकता है तुझ सेे जब मिल कर भी उदासी कम नहीं होती तेरे बग़ैर गुज़ारा कैसे हो सकता है
Jawwad Sheikh
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याद कर लेता हूँ रोज़ हर किसी को ज़िन्दगी जाने कब इम्तिहान लेले
Vivek Chaturvedi
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न देखो डालकर आँखों में आँखें तुम नहीं , आँखें तेरी गीली हो जाएँगी
Vivek Chaturvedi
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गर घड़ी हो ख़राब अपनी ही तो फिर वक़्त के चाल का पता नहीं चलता
Vivek Chaturvedi
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ग़लत वो था तो मैं उसे कैसे कहता उसे पहले ही मैं ज़बाँ दे चुका था
Vivek Chaturvedi
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हो गर बराबरी में आना तो बढ़ा कद तू ये लोग, छोटा हो कद तो गले नहीं लगते
Vivek Chaturvedi
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