याद कर लेता हूँ रोज़ हर किसी को ज़िन्दगी जाने कब इम्तिहान लेले
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माना कि तेरी दीद के क़ाबिल नहीं हूँ मैं तू मेरा शौक़ देख मिरा इंतिज़ार देख
Allama Iqbal
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ये दुख अलग है कि उस सेे मैं दूर हो रहा हूँ ये ग़म जुदा है वो ख़ुद मुझे दूर कर रहा है तेरे बिछड़ने पर लिख रहा हूँ मैं ताज़ा ग़ज़लें ये तेरा ग़म है जो मुझ को मशहूर कर रहा है
Tehzeeb Hafi
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तू किसी और ही दुनिया में मिली थी मुझ सेे तू किसी और ही मौसम की महक लाई थी डर रहा था कि कहीं ज़ख़्म न भर जाएँ मेरे और तू मुट्ठियाँ भर-भर के नमक लाई थी
Tehzeeb Hafi
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उसे किसी से मोहब्बत थी और वो मैं नहीं था ये बात मुझ सेे ज़ियादा उसे रुलाती थी
Ali Zaryoun
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गुलाब ख़्वाब दवा ज़हर जाम क्या क्या है मैं आ गया हूँ बता इंतिज़ाम क्या क्या है
Rahat Indori
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न देखो डालकर आँखों में आँखें तुम नहीं , आँखें तेरी गीली हो जाएँगी
Vivek Chaturvedi
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जीने लगा हूँ मैं भी तब से मरने लगा हूँ तुझ पे जब से
Vivek Chaturvedi
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हवा बुझा देती है जिन के घर के चिरागों को वो जला नहीं सकते अपने हाथों से चिरागों को वो
Vivek Chaturvedi
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बाँटते हैं वही लोग अक्सर ज़मीं लोग वो लड़ते है जो ज़मीं के लिए
Vivek Chaturvedi
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अब ज़ख़्म ज़ख़्म से मेरा पाँव भर चुका था या'नी बहुत से रस्तों से मैं गुज़र चुका था
Vivek Chaturvedi
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