अब ज़ख़्म ज़ख़्म से मेरा पाँव भर चुका था या'नी बहुत से रस्तों से मैं गुज़र चुका था
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तेरे सिवा भी कई रंग ख़ुश नज़र थे मगर जो तुझ को देख चुका हो वो और क्या देखे
Parveen Shakir
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मेरा अरमान मेरी ख़्वाहिश नहीं है ये दुनिया मेरी फ़रमाइश नहीं है मैं तेरे ख़्वाब वापस कर रहा हूँ मेरी आँखों में गुंजाइश नहीं है
Abrar Kashif
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अगर तुम हो तो घबराने की कोई बात थोड़ी है ज़रा सी बूँदा-बाँदी है बहुत बरसात थोड़ी है ये राह-ए-इश्क़ है इस में क़दम ऐसे ही उठते हैं मोहब्बत सोचने वालों के बस की बात थोड़ी है
Abrar Kashif
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माना कि तेरी दीद के क़ाबिल नहीं हूँ मैं तू मेरा शौक़ देख मिरा इंतिज़ार देख
Allama Iqbal
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हम ने पर्चे आँसुओं से भर दिए और तुम ने इतने कम नंबर दिए ऊंचे नीचे घर थे बस्ती में बहुत जलजले ने सब बराबर कर दिए
Zubair Ali Tabish
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याद कर लेता हूँ रोज़ हर किसी को ज़िन्दगी जाने कब इम्तिहान लेले
Vivek Chaturvedi
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न देखो डालकर आँखों में आँखें तुम नहीं , आँखें तेरी गीली हो जाएँगी
Vivek Chaturvedi
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गर घड़ी हो ख़राब अपनी ही तो फिर वक़्त के चाल का पता नहीं चलता
Vivek Chaturvedi
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ग़लत वो था तो मैं उसे कैसे कहता उसे पहले ही मैं ज़बाँ दे चुका था
Vivek Chaturvedi
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हो गर बराबरी में आना तो बढ़ा कद तू ये लोग, छोटा हो कद तो गले नहीं लगते
Vivek Chaturvedi
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