हमारा क़त्ल पहेली है एक इक के लिए किसी को क्या है ख़बर हम ने ख़ुद-कुशी की है
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ख़ुदी को कर बुलंद इतना कि हर तक़दीर से पहले ख़ुदा बंदे से ख़ुद पूछे बता तेरी रज़ा क्या है
Allama Iqbal
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ये मुझे चैन क्यूँ नहीं पड़ता एक ही शख़्स था जहान में क्या
Jaun Elia
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पूछते हैं वो कि ग़ालिब कौन है कोई बतलाओ कि हम बतलाएँ क्या
Mirza Ghalib
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क्या ख़बर कौन था वो, और मेरा क्या लगता था जिस सेे मिल कर मुझे, हर शख़्स बुरा लगता था
Tehzeeb Hafi
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मेरे नाम से क्या मतलब है तुम्हें मिट जाएगा या रह जाता है जब तुम ने ही साथ नहीं रहना फिर पीछे क्या रह जाता है मेरे पास आने तक और किसी की याद उसे खा जाती है वो मुझ तक कम ही पहुँचता है किसी और जगह रह जाता है
Tehzeeb Hafi
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वो अक्स जिस की एक भी मुमकिन नहीं मिसाल जो बन के मेरे ज़ेहन में पैकर ठहर गया
divya 'sabaa'
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यूँँ तो तमाम रंग थे तस्वीर में मिरी लेकिन सियाह रंग ने बेहतर किया मुझे
divya 'sabaa'
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सुना है 'मीर' को पढ़ने लगा है वो जब से बहुत उदास सा रहता है बोलता भी नहीं
divya 'sabaa'
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हम तो मेमार हैं कर लेंगे नशेमन तामीर हाँ मगर ठहरो ये तूफ़ान गुज़र जाने दो
divya 'sabaa'
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हम ने ग़ज़ल में उस के सिवा सब सेे बात की अब इस को आप कुछ भी कहें इस्तिलाह में
divya 'sabaa'
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