सुना है 'मीर' को पढ़ने लगा है वो जब से बहुत उदास सा रहता है बोलता भी नहीं
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मैं भी बहुत अजीब हूँ इतना अजीब हूँ कि बस ख़ुद को तबाह कर लिया और मलाल भी नहीं
Jaun Elia
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सुहागन भी बता देगी मगर तुम पूछो विधवा से ये मंगलसूत्र ज़ेवर के अलावा भी बहुत कुछ है ये क्या इक मक़बरे को आख़री हद मान बैठे हो मोहब्बत संग-ए-मरमर के अलावा भी बहुत कुछ है
Zubair Ali Tabish
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तुम बहुत ख़ुश रहोगी मेरे साथ वैसे हर इक की अपनी मर्ज़ी है
Tehzeeb Hafi
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बहुत मज़ाक़ उड़ाते हो तुम ग़रीबों का मदद तो करते हो तस्वीर खींच लेते हो
Nawaz Deobandi
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हम तो कुछ देर हँस भी लेते हैं दिल हमेशा उदास रहता है
Bashir Badr
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यूँँ तो तमाम रंग थे तस्वीर में मिरी लेकिन सियाह रंग ने बेहतर किया मुझे
divya 'sabaa'
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राह में हर पल भटक जाने का डर बाक़ी रहे या'नी मंजिल पर पहुँच कर भी सफ़र बाक़ी रहे
divya 'sabaa'
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आशिक़ों का यही अफ़साना है और कुछ भी नहीं कुछ न कर पाएँ तो वो आह-ओ-फ़ुग़ाँ तक पहुँचे
divya 'sabaa'
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उस से बे-दर्दी का शिकवा ठीक नहीं है हम भी उस सेे कौन सा बे-मतलब मिलते हैं
divya 'sabaa'
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कहाँ के सजदा-ए-क़िरअत कहाँ का ध्यान और पूजा इबादत-गाह भी अब हम बराए शर बनाते हैं
divya 'sabaa'
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