कहाँ के सजदा-ए-क़िरअत कहाँ का ध्यान और पूजा इबादत-गाह भी अब हम बराए शर बनाते हैं
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कहाँ तो ख़ाक उड़ाता था मुस्कुराता था मुझ ऐसे शख़्स को भी क्या से क्या बनाया गया
Vivek Bijnori
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घर की इस बार मुकम्मल मैं तलाशी लूँगा ग़म छुपा कर मिरे माँ बाप कहाँ रखते थे
Unknown
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पुराने यार भी आपस में अब नहीं मिलते न जाने कौन कहाँ दिल लगा के बैठ गया
Fazil Jamili
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तन्हाई ये तंज करे है तन्हा क्यूँ है यार कहाँ है आगे पीछे चलने वाले
Vishal Singh Tabish
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अच्छा ख़्वाब दिखाया तुम ने ख़्वाब दिखाने वालों में ऐसी बात कहाँ होती थी इस सेे पहले वालों में दरवाज़े पर ताला हो तो फिर भी दस्तक दे देना नाम तो शामिल हो जाएगा दस्तक देने वालों में
Aman Shahzadi
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यूँँ तो तमाम रंग थे तस्वीर में मिरी लेकिन सियाह रंग ने बेहतर किया मुझे
divya 'sabaa'
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सुना है 'मीर' को पढ़ने लगा है वो जब से बहुत उदास सा रहता है बोलता भी नहीं
divya 'sabaa'
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वो अक्स जिस की एक भी मुमकिन नहीं मिसाल जो बन के मेरे ज़ेहन में पैकर ठहर गया
divya 'sabaa'
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हम ने ग़ज़ल में उस के सिवा सब सेे बात की अब इस को आप कुछ भी कहें इस्तिलाह में
divya 'sabaa'
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सुकून जिस में मुयस्सर नहीं है इक पल भी हयात है मगर उस को हयात क्या लिखना
divya 'sabaa'
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