हम ने ग़ज़ल में उस के सिवा सब सेे बात की अब इस को आप कुछ भी कहें इस्तिलाह में
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तुम्हें हुस्न पर दस्तरस है मोहब्बत वोहब्बत बड़ा जानते हो तो फिर ये बताओ कि तुम उस की आँखों के बारे में क्या जानते हो ये जुग़राफ़िया फ़ल्सफ़ा साईकॉलोजी साइंस रियाज़ी वग़ैरा ये सब जानना भी अहम है मगर उस के घर का पता जानते हो
Tehzeeb Hafi
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हम वो हैं जो ख़ुदा को भूल गए तुम मेरी जान किस गुमान में हो
Jaun Elia
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किसी को घर से निकलते ही मिल गई मंज़िल कोई हमारी तरह उम्र भर सफ़र में रहा
Ahmad Faraz
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बिछड़ कर उस का दिल लग भी गया तो क्या लगेगा वो थक जाएगा और मेरे गले से आ लगेगा मैं मुश्किल में तुम्हारे काम आऊँ या ना आऊँ मुझे आवाज़ दे लेना तुम्हें अच्छा लगेगा
Tehzeeb Hafi
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मुझ से मत पूछो के उस शख़्स में क्या अच्छा है अच्छे अच्छों से मुझे मेरा बुरा अच्छा है किस तरह मुझ से मुहब्बत में कोई जीत गया ये न कह देना के बिस्तर में बड़ा अच्छा है
Tehzeeb Hafi
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वो अक्स जिस की एक भी मुमकिन नहीं मिसाल जो बन के मेरे ज़ेहन में पैकर ठहर गया
divya 'sabaa'
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सुना है 'मीर' को पढ़ने लगा है वो जब से बहुत उदास सा रहता है बोलता भी नहीं
divya 'sabaa'
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राह में हर पल भटक जाने का डर बाक़ी रहे या'नी मंजिल पर पहुँच कर भी सफ़र बाक़ी रहे
divya 'sabaa'
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उस से बे-दर्दी का शिकवा ठीक नहीं है हम भी उस सेे कौन सा बे-मतलब मिलते हैं
divya 'sabaa'
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कहाँ के सजदा-ए-क़िरअत कहाँ का ध्यान और पूजा इबादत-गाह भी अब हम बराए शर बनाते हैं
divya 'sabaa'
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