सुकून जिस में मुयस्सर नहीं है इक पल भी हयात है मगर उस को हयात क्या लिखना
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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शाख़ों से टूट जाएँ वो पत्ते नहीं हैं हम आँधी से कोई कह दे कि औक़ात में रहे
Rahat Indori
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तेरी सूरत से है आलम में बहारों को सबात तेरी आँखों के सिवा दुनिया में रक्खा क्या है
Faiz Ahmad Faiz
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कुछ बात है कि हस्ती मिटती नहीं हमारी सदियों रहा है दुश्मन दौर-ए-ज़माँ हमारा
Allama Iqbal
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हम भी दरिया हैं हमें अपना हुनर मालूम है जिस तरफ़ भी चल पड़ेंगे रास्ता हो जाएगा
Bashir Badr
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वो अक्स जिस की एक भी मुमकिन नहीं मिसाल जो बन के मेरे ज़ेहन में पैकर ठहर गया
divya 'sabaa'
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यूँँ तो तमाम रंग थे तस्वीर में मिरी लेकिन सियाह रंग ने बेहतर किया मुझे
divya 'sabaa'
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हमारा क़त्ल पहेली है एक इक के लिए किसी को क्या है ख़बर हम ने ख़ुद-कुशी की है
divya 'sabaa'
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कहाँ के सजदा-ए-क़िरअत कहाँ का ध्यान और पूजा इबादत-गाह भी अब हम बराए शर बनाते हैं
divya 'sabaa'
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उस से बे-दर्दी का शिकवा ठीक नहीं है हम भी उस सेे कौन सा बे-मतलब मिलते हैं
divya 'sabaa'
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