हमें दरकार है फिर इक सफ़र की ज़रा सा काम बाक़ी रह गया है
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रक़ीब आ कर बताते हैं यहाँ तिल है वहाँ तिल है हमें ये जानकारी थी मियाँ पहले बहुत पहले
Anand Raj Singh
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ये अलग बात कि ख़ामोश खड़े रहते हैं फिर भी जो लोग बड़े हैं, वो बड़े रहते हैं
Rahat Indori
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किताब फ़िल्म सफ़र इश्क़ शा'इरी औरत कहाँ कहाँ न गया ख़ुद को ढूँढ़ता हुआ मैं
Jawwad Sheikh
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धूप पड़े उस पर तो तुम बादल बन जाना अब वो मिलने आए तो उस को घर ठहराना। तुम को दूर से देखते देखते गुज़र रही है मर जाना पर किसी गरीब के काम न आना।
Tehzeeb Hafi
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हुआ ही क्या जो वो हमें मिला नहीं बदन ही सिर्फ़ एक रास्ता नहीं ये पहला इश्क़ है तुम्हारा सोच लो मेरे लिए ये रास्ता नया नहीं
Azhar Iqbal
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ख़त्म होगा एक दिन ये भी सफ़र एक दिन सब राएगाँ हो जाएगा
Khalid Azad
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अब तो आ जाओ मेरा हिज्र मुकम्मल कर दो अब तो सूरज है मेरी साँस का ढलने वाला
Khalid Azad
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ख़ुद से मिलने का वक़्त मिल जाए तेरे बारे में तब मैं सोचूँगा
Khalid Azad
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अब हद से गुज़र जाने का इमकान बहुत है लुटने को अभी इश्क़ में सामान बहुत है आँखों को सहूलत है उसे देख रही हैं इतनी भी सहूलत तो मेरी जान बहुत है
Khalid Azad
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तुम्हारे ख़्वाब आँखों में सजा कर किसी दिल में ठिकाना कर रहे हैं
Khalid Azad
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