अब हद से गुज़र जाने का इमकान बहुत है लुटने को अभी इश्क़ में सामान बहुत है आँखों को सहूलत है उसे देख रही हैं इतनी भी सहूलत तो मेरी जान बहुत है
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उजाले अपनी यादों के हमारे साथ रहने दो न जाने किस गली में ज़िंदगी की शाम हो जाए
Bashir Badr
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इलाज अपना कराते फिर रहे हो जाने किस किस से मोहब्बत कर के देखो ना मोहब्बत क्यूँँ नहीं करते
Farhat Ehsaas
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दिन ढल गया और रात गुज़रने की आस में सूरज नदी में डूब गया, हम गिलास में
Rahat Indori
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बहुत मज़ाक़ उड़ाते हो तुम ग़रीबों का मदद तो करते हो तस्वीर खींच लेते हो
Nawaz Deobandi
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सुहागन भी बता देगी मगर तुम पूछो विधवा से ये मंगलसूत्र ज़ेवर के अलावा भी बहुत कुछ है ये क्या इक मक़बरे को आख़री हद मान बैठे हो मोहब्बत संग-ए-मरमर के अलावा भी बहुत कुछ है
Zubair Ali Tabish
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मैं भी तो इसी ख़ाक से तामीर हुआ हूँ मुझ में भी कई रंग ज़माने के मिलेंगे
Khalid Azad
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तुम्हारे ख़्वाब आँखों में सजा कर किसी दिल में ठिकाना कर रहे हैं
Khalid Azad
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मैं ने कमरे से देख ली दुनिया तेरी तस्वीर सामने रख कर
Khalid Azad
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ख़ुद से मिलने का वक़्त मिल जाए तेरे बारे में तब मैं सोचूँगा
Khalid Azad
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हम तेरे बा'द किसी और के भी हो जाते था तो मुमकिन ये मगर दिल ने गवारा न किया
Khalid Azad
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