hamein pukar na ab ai arus-e-shabnam-o-gul hamein na dhundh ki hum be-kanar sahra hain
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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हम ने उस को इतना देखा जितना देखा जा सकता था लेकिन फिर भी दो आँखों से कितना देखा जा सकता था
Farrukh Yar
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हम को मालूम है जन्नत की हक़ीक़त लेकिन दिल के ख़ुश रखने को 'ग़ालिब' ये ख़याल अच्छा है
Mirza Ghalib
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किसी को घर से निकलते ही मिल गई मंज़िल कोई हमारी तरह उम्र भर सफ़र में रहा
Ahmad Faraz
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शाख़ों से टूट जाएँ वो पत्ते नहीं हैं हम आँधी से कोई कह दे कि औक़ात में रहे
Rahat Indori
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तेरी वफ़ा में मिली आरज़ू-ए-मौत मुझे जो मौत मिल गई होती तो कोई बात भी थी
Khalilur Rahman Azmi
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सुना रहा हूँ उन्हें झूट-मूट इक क़िस्सा कि एक शख़्स मोहब्बत में कामयाब रहा
Khalilur Rahman Azmi
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निकाले गए इस के मअ'नी हज़ार अजब चीज़ थी इक मेरी ख़ामुशी
Khalilur Rahman Azmi
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हम सा मिले कोई तो कहें उस से हाल-ए-दिल हम बन गए ज़माने में क्यूँ अपनी ही मिसाल
Khalilur Rahman Azmi
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देखने वाला कोई मिले तो दिल के दाग़ दिखाऊँ ये नगरी अँधों की नगरी किस को क्या समझाऊँ
Khalilur Rahman Azmi
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