हम ने पहली मोहब्बत भी पाई नहीं आख़िरी इश्क़ भी अब गया हाथ से
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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शाख़ों से टूट जाएँ वो पत्ते नहीं हैं हम आँधी से कोई कह दे कि औक़ात में रहे
Rahat Indori
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सोचूँ तो सारी उम्र मोहब्बत में कट गई देखूँ तो एक शख़्स भी मेरा नहीं हुआ
Jaun Elia
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अगर तुम हो तो घबराने की कोई बात थोड़ी है ज़रा सी बूँदा-बाँदी है बहुत बरसात थोड़ी है ये राह-ए-इश्क़ है इस में क़दम ऐसे ही उठते हैं मोहब्बत सोचने वालों के बस की बात थोड़ी है
Abrar Kashif
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ये मुझे चैन क्यूँ नहीं पड़ता एक ही शख़्स था जहान में क्या
Jaun Elia
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ये कमीने वक़्त पर वापस नहीं देते दोस्तों को तुम कभी पैसे नहीं देना
Raja Singh 'Kaabil'
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तुझे पाकर यूँँ लगता है कि जैसे आठ वर्षों बा'द किसी ने खोद कर के क़ब्र से बाहर निकाला है
Raja Singh 'Kaabil'
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याद मुझ को उस ने इतना कर लिया हिचकियों से साँस मेरी रुक गई
Raja Singh 'Kaabil'
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इत्तेफ़ाकन जब कभी उस सेे मिलूँगा बे-झिझक में गाल उस के चूम लूँगा
Raja Singh 'Kaabil'
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मैं ने नहीं बोला उसे ख़्वाबों में आना है तुम्हें वो शख़्स तो ख़्वाबों में अपने आप हाज़िर हो गया मैं चूमने वाला था उस के सुर्ख़ होंठों को तभी जाने कहाँ से यार उस का बाप हाज़िर हो गया
Raja Singh 'Kaabil'
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