इत्तेफ़ाकन जब कभी उस सेे मिलूँगा बे-झिझक में गाल उस के चूम लूँगा
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तुम्हें हुस्न पर दस्तरस है मोहब्बत वोहब्बत बड़ा जानते हो तो फिर ये बताओ कि तुम उस की आँखों के बारे में क्या जानते हो ये जुग़राफ़िया फ़ल्सफ़ा साईकॉलोजी साइंस रियाज़ी वग़ैरा ये सब जानना भी अहम है मगर उस के घर का पता जानते हो
Tehzeeb Hafi
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किसी को घर से निकलते ही मिल गई मंज़िल कोई हमारी तरह उम्र भर सफ़र में रहा
Ahmad Faraz
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किसी गली में किराए पे घर लिया उस ने फिर उस गली में घरों के किराए बढ़ने लगे
Umair Najmi
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हम वो हैं जो ख़ुदा को भूल गए तुम मेरी जान किस गुमान में हो
Jaun Elia
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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तुझे पाकर यूँँ लगता है कि जैसे आठ वर्षों बा'द किसी ने खोद कर के क़ब्र से बाहर निकाला है
Raja Singh 'Kaabil'
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ये कमीने वक़्त पर वापस नहीं देते दोस्तों को तुम कभी पैसे नहीं देना
Raja Singh 'Kaabil'
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मैं ने नहीं बोला उसे ख़्वाबों में आना है तुम्हें वो शख़्स तो ख़्वाबों में अपने आप हाज़िर हो गया मैं चूमने वाला था उस के सुर्ख़ होंठों को तभी जाने कहाँ से यार उस का बाप हाज़िर हो गया
Raja Singh 'Kaabil'
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याद मुझ को उस ने इतना कर लिया हिचकियों से साँस मेरी रुक गई
Raja Singh 'Kaabil'
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जीभ जैसे है पहुँचती एक हिलते दाँत पर उस तरह ही याद मुझ तक है पहुँच जाती तेरी
Raja Singh 'Kaabil'
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