हँसाया भी कभी मुझ को रुलाया भी ये थोड़ा थोड़ा मुझ को हिज्र भाया भी तेरे जाने का जाएगा नहीं ये ग़म अगर तू पास मेरे लौट आया भी वो आलम देखा है तन्हाई का मैं ने नहीं मुझ सेे था करता बातें साया भी कभी उस ने बनाना है नहीं अपना कभी होने नहीं देना पराया भी
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मेहरबाँ हम पे हर इक रात हुआ करती थी आँख लगते ही मुलाक़ात हुआ करती थी हिज्र की रात है और आँख में आँसू भी नहीं ऐसे मौसम में तो बरसात हुआ करती थी
Ismail Raaz
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प्यार दो बार थोड़ी होता है हो तो फिर प्यार थोड़ी होता है यही बेहतर है तुम उसे रोको मुझ सेे इनकार थोड़ी होता है
Zubair Ali Tabish
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तू मोहब्बत से कोई चाल तो चल हार जाने का हौसला है मुझे
Ahmad Faraz
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मैं चाहता हूँ मोहब्बत मेरा वो हाल करे कि ख़्वाब में भी दोबारा कभी मजाल न हो
Jawwad Sheikh
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मैं ने जो कुछ भी सोचा हुआ है, मैं वो वक़्त आने पे कर जाऊँगा तुम मुझे ज़हर लगते हो और मैं किसी दिन तुम्हें पी के मर जाऊँगा
Tehzeeb Hafi
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तेरी यादों से भर जाती हैं आँखें मगर ये मन नहीं भरता हमारा
AKASH
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बस उस पे मरते जाना है मुझ को ये करते जाना है
AKASH
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कोई कहता नहीं बुरा उस को मानते हैं सभी ख़ुदा उस को
AKASH
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काशी का'बा एक तरफ़ तेरा कूचा एक तरफ़ एक तरफ़ दारू वारु तेरा बोसा एक तरफ़
AKASH
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समुंदर जैसी आँखें उस की देखीं जब हमें क्यूँ दी है बीनाई समझ आई
AKASH
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