sherKuch Alfaaz

हँसाया भी कभी मुझ को रुलाया भी ये थोड़ा थोड़ा मुझ को हिज्र भाया भी तेरे जाने का जाएगा नहीं ये ग़म अगर तू पास मेरे लौट आया भी वो आलम देखा है तन्हाई का मैं ने नहीं मुझ सेे था करता बातें साया भी कभी उस ने बनाना है नहीं अपना कभी होने नहीं देना पराया भी

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