हवा जब चली फड़फड़ा कर उड़े परिंदे पुराने महल्लात के
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तरीक़े और भी हैं इस तरह परखा नहीं जाता चराग़ों को हवा के सामने रक्खा नहीं जाता मोहब्बत फ़ैसला करती है पहले चंद लम्हों में जहाँ पर इश्क़ होता है वहाँ सोचा नहीं जाता
Abrar Kashif
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किसी ने प्यार जताया जता के छोड़ दिया हवा में मुझ को उठाया उठा के छोड़ दिया किसे सिखा रहे हो इश्क़ तुम नए लड़के ये राग हम ने मियाँ गा बजा के छोड़ दिया
Vishnu virat
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मुझे पहले पहल लगता था ज़ाती मसअला है मैं फिर समझा मोहब्बत क़ायनाती मसअला है परिंदे क़ैद हैं तुम चहचहाहट चाहते हो तुम्हें तो अच्छा ख़ासा नफ़सियाती मसअला है
Umair Najmi
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जब मोहब्बत भर हवा में आँख ये लिखने लगी नम हुई पूरी फ़िज़ा और तुम मुझे दिखने लगी
Divya 'Kumar Sahab'
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मुझ को किस दश्त से लाई थी कहाँ छोड़ गई इन हवाओं से कोई पूछने वाला भी नहीं
Tehzeeb Hafi
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मकाँ है क़ब्र जिसे लोग ख़ुद बनाते हैं मैं अपने घर में हूँ या मैं किसी मज़ार में हूँ
Muneer Niyazi
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हम भी 'मुनीर' अब दुनिया-दारी कर के वक़्त गुज़ारेंगे होते होते जीने के भी लाख बहाने आ जाते हैं
Muneer Niyazi
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ग़म की बारिश ने भी तेरे नक़्श को धोया नहीं तू ने मुझ को खो दिया मैं ने तुझे खोया नहीं
Muneer Niyazi
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मोहब्बत अब नहीं होगी ये कुछ दिन बा'द में होगी गुज़र जाएँगे जब ये दिन ये उन की याद में होगी
Muneer Niyazi
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इक और दरिया का सामना था 'मुनीर' मुझ को मैं एक दरिया के पार उतरा तो मैं ने देखा
Muneer Niyazi
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