हिज्र के दर्द की अब वो बात करता कहाँ है दर्द बे-रोज़गारी का झेल जो भी रहा है
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तेरी सूरत से है आलम में बहारों को सबात तेरी आँखों के सिवा दुनिया में रक्खा क्या है
Faiz Ahmad Faiz
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ये अलग बात कि ख़ामोश खड़े रहते हैं फिर भी जो लोग बड़े हैं, वो बड़े रहते हैं
Rahat Indori
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ये मुहब्बत की किताबें कौन यूँँ कब तक पढ़े कौन मारे रोज़ ही इक बात पे अपना ही मन
nakul kumar
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उसे किसी से मोहब्बत थी और वो मैं नहीं था ये बात मुझ सेे ज़ियादा उसे रुलाती थी
Ali Zaryoun
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बात करो रूठे यारों से सन्नाटों से डर जाते हैं प्यार अकेला जी लेता है दोस्त अकेले मर जाते हैं
Kumar Vishwas
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ये लोग पूछेंगे हमें ज़रा ख़राब होने दो अधर से चूम लेंगे बस मियाँ शराब होने दो
Shubham Rai 'shubh'
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अभी जंग जारी है हारा नहीं हूँ कि हथियार अपना उतारा नहीं हूँ ज़मीं है ये मेरी न ललकारो मुझ को सुनामी हूँ मैं कोई धारा नहीं हूँ
Shubham Rai 'shubh'
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जीतते ही तुम कहीं अच्छा सा कोई घर बनाओगे काम करने की जगह तुम घूम कर छुट्टी मनाओगे
Shubham Rai 'shubh'
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बीतता वक़्त इक ख़जाना है क्या नया साल क्या पुराना है
Shubham Rai 'shubh'
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ज़िंदगानी गुज़र जाएगी फिर कहानी गुज़र जाएगी
Shubham Rai 'shubh'
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