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हो भले तिनका सही वो इस नदी हम को तो वो इक सहारा लगता है

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मत पूछो कितना ग़मगीं हूँ गंगा जी और जमुना जी ज़्यादा तुम को याद नहीं हूँ गंगा जी और जमुना जी अमरोहे में बान नदी के पास जो लड़का रहता था अब वो कहाँ है मैं तो वहीं हूँ गंगा जी और जमुना जी

Jaun Elia

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सितारे और क़िस्मत देख कर घर से निकलते हैं जो बुज़दिल हैं मुहूरत देख कर घर से निकलते हैं हमें लेकिन सफ़र की मुश्किलों से डर नहीं लगता कि हम बच्चों की सूरत देख कर घर से निकलते हैं

Abrar Kashif

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घर में घुसता हूँ तो लगता है कि रेगिस्तान है मेरे इक कमरे में सारे शहर भर की गर्द है

nakul kumar

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तेरा चेहरा सुब्ह का तारा लगता है सुब्ह का तारा कितना प्यारा लगता है तुम से मिल कर इमली मीठी लगती है तुम से बिछड़ कर शहद भी खारा लगता है

Kaif Bhopali

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अब हमें देख के लगता तो नहीं है लेकिन हम कभी उस के पसंदीदा हुआ करते थे

Jawwad Sheikh

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